Saturday, April 25, 2026
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IVRI: किसानों को कैसे मिलेगा शोध की तकनीक का लाभ, आप भी जानिए

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कृषि और पशुपालन क्षेत्र में शोध की नई तकनीक और उससे किसानों को मिलने वाले लाभ पर मंथन

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), इज्जतनगर में 27वीं प्रसार परिषद की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, राज्य विभागों के प्रतिनिधियों और प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

ICAR (आईसीएआर) के उप महानिदेशक एवं संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेन्द्र भट्टा ने कहा कि कृषि अनुसंधान और किसानों के खेत के बीच की दूरी को कम करने में प्रसार सेवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों और अटारी के माध्यम से नई तकनीकों के प्रभावी प्रसार, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और किसानों के फीडबैक के आधार पर सुधार की आवश्यकता बताई। उन्होंने संस्थान की दृश्यता बढ़ाने के लिए ‘ओपन डे’, लघु वीडियो और शैक्षणिक संस्थानों के साथ संवाद जैसे नवाचारों को अपनाने पर जोर दिया। साथ ही प्रभाव आकलन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) विकसित करने की बात कही

संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष फोकस

आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. आर. आर. बर्मन ने संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान को कृषि के लिए बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। उन्होंने मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग, सॉयल हेल्थ कार्ड, जैविक खाद और बायोफर्टिलाइज़र के प्रयोग से लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही वर्ष 2030 तक उर्वरक उपयोग में 25% कमी के राष्ट्रीय लक्ष्य का भी उल्लेख किया।अटारी, कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने आईवीआरआई द्वारा विकसित पशु विज्ञान के ‘पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज’ को कृषि विज्ञान केंद्रों तक पहुंचाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने ग्रीन मैन्योरिंग, अजोला, वर्मी कम्पोस्ट और बायोफर्टिलाइज़र जैसे उपायों को बढ़ावा देने की बात कही।

15 हजार से अधिक प्रसार गतिविधियां

संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) डॉ. रूपसी तिवारी ने बताया कि संस्थान ने पिछले वर्ष 15,521 प्रसार गतिविधियों का आयोजन किया, जिससे करीब 1.45 लाख लाभार्थियों तक पहुंच बनाई गई। इनमें महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। उन्होंने फार्म स्कूल, प्रशिक्षण कार्यक्रम, परामर्श सेवाओं और तकनीकी साहित्य के विकास पर विशेष ध्यान देने की जानकारी दी। साथ ही अगले तीन वर्षों में किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु ‘पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज’ तैयार किए जा रहे हैं।

 राज्यों के साथ समन्वय और नई पहल

बैठक में विभिन्न राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। ओडिशा सरकार द्वारा आईवीआरआई को “नॉलेज पार्टनर” बनाने का प्रस्ताव संस्थान की विश्वसनीयता को दर्शाता है। संस्थान द्वारा युवाओं और छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम, स्टार्टअप अवसरों की जानकारी और पशुपालन क्षेत्र में करियर मार्गदर्शन देने की योजना भी सामने आई। यह बैठक कृषि और पशुपालन क्षेत्र में नई तकनीकों के प्रभावी प्रसार, किसानों की आय बढ़ाने और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। वैज्ञानिकों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय से आने वाले समय में कृषि व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

(सुधाकर प्रसाद शुक्ल की विशेष रिपोर्ट)

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