Saturday, April 25, 2026
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हर कोर्स में AI और भारतीय ज्ञान, DAVV में कवर होंगे 170 से अधिक कोर्स

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इंदौर के प्रमुख विश्वविद्यालय देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) ने बड़ा कदम उठाया है। DAVV ने वर्ष 2026–27 शैक्षिक सत्र से सभी स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंडियन नॉलेज सिस्टम (IKS) को अनिवार्य रूप से शामिल करने का निर्णय लिया है।

यह निर्णय न केवल शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाएगा, बल्कि भारतीय परंपरागत ज्ञान और नवीनतम तकनीक के बीच एक मजबूत सेतु भी तैयार करेगा।

यह अहम निर्णय कुलपति राकेश सिंघई की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। इसमें रजिस्ट्रार प्रज्वल खरे, डीसीडीसी सचिन शर्मा, विभिन्न संकायों के डीन और बोर्ड ऑफ स्टडीज के चेयरपर्सन शामिल रहे।

 

  • यह पहल विश्वविद्यालय के 170+ कोर्स में लागू होगी

  • साइंस, इंजीनियरिंग, कॉमर्स, मैनेजमेंट और ह्यूमैनिटीज—सभी स्ट्रीम शामिल

  • विश्वविद्यालय के टीचिंग डिपार्टमेंट (UTDs) और संबद्ध कॉलेजों में एकसमान लागू

DAVV मध्य प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय बन जाएगा, जो AI और IKS दोनों को सभी विषयों में एक साथ लागू करेगा।

  • छात्रों को मिलेगा AI टूल्स, डेटा एनालिसिस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग का प्रैक्टिकल अनुभव
  • पारंपरिक विषयों जैसे भारतीय दर्शन, विज्ञान और सतत विकास की समझ भी मजबूत होगी
  • शिक्षा बनेगी जॉब-ओरिएंटेड और फ्यूचर-रेडी

कुलपति राकेश सिंघई के अनुसार,

यह पहल भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास है, जिससे एक संतुलित और भविष्य उन्मुख शिक्षा मॉडल तैयार होगा।


विद्यार्थियों को ये होंगे लाभ –

  •  रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी
  •  डिजिटल और एनालिटिकल स्किल्स का विकास
  •  तकनीकी + सांस्कृतिक ज्ञान का संतुलन
  •  सभी स्ट्रीम के छात्रों को समान एक्सपोजर
  • फैकल्टी के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम, वर्कशॉप और सहयोगात्मक पहल
  • ताकि AI और IKS को प्रभावी तरीके से पढ़ाया जा सकेगा

पढ़ाई पर नहीं बढ़ेगा बोझ-

विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ किया है कि यह नया पाठ्यक्रम अतिरिक्त बोझ नहीं बनेगा, बल्कि इसे मौजूदा विषयों में ही इंटीग्रेट किया जाएगा। इससे पढ़ाई अधिक इंटरडिसिप्लिनरी और रोचक बनेगी।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य ऐसे छात्रों को तैयार करना है जो तकनीकी रूप से सक्षम हों और भारतीय संस्कृति व मूल्यों से भी जुड़े हों

DAVV का यह फैसला शिक्षा क्षेत्र में एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह मॉडल अगर सफल रहा, तो देश के अन्य विश्वविद्यालय भी इसी राह पर चल सकते हैं।

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