– राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नमो फाउंडेशन की शिकायत पर की सुनवाई, अपनाया सख्त रुख
अब तक प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से केवल मनमानी फीस ही नहीं वसूलते थे, बल्कि अपनी खास दुकानों पर ड्रेस और निजी पब्लिशर्स की तीन से पांच गुना रेट में किताबें खरीदने का भी दबाव बनाते थे। इतना हीं, तमाम स्कूल तो अपनी निजी बसों से बच्चों को लाने के लिए भी मजबूर करते थे। मगर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मसले का संज्ञान लेकर राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। इसमें 30 दिन के अंदर जवाब मांगा गया है।
एनएचआरसी ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी करते हुए कहा कि निजी स्कूल छात्रों के अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने का दबाव बनाते हैं। आयोग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे नोटिस में कहा कि राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) की धारा (29) का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर अपने खास प्रकाशकों की पुस्तकों को खरीदने का दबाव डालने के संबंध में नमो फाउंडेशन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायत भेजी थी। उस पर आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने 15 अप्रैल को सुनवाई की थी। इस शिकायत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को बताया गया था कि सीबीएसई, आईसीएसई समेत अन्य बोर्डोँ से संबद्ध निजी स्कूल और कॉलेज एनसीईआरटी और एससीईआरटी की पुस्तकों को पढ़ाने की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने का दबाव बनाते हैं। यह आरटीई की धारा (29) का उल्लंघन है। निजी स्कूलों की इस मनमानी से अभिभावकों पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है। इसके साथ ही सबको समान शिक्षा देने की नीति भी प्रभावित होती है। शिकायत में बताया गया था कि अभिभावकों से मजबूरी में खरीदवाई जाने वाली निजी स्कूलों में विभिन्न क्लासेज में अलग-अलग विषयों की किताबें और कापियां तुलनात्मक रुप से तीन से पांच गुनी महंगी होती है। यह राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति का भी खुला उल्लंघन है। केंद्र सरकार ने साल 2020 में राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति बनाई थी, जिसमें बच्चों का बैग हल्का रखने की बात कही गई थी।
आयोग के कड़े निर्देश:
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30 दिन में जवाब: राज्यों को एक महीने के भीतर स्कूलों में किताबों और स्कूल बैग पॉलिसी की रिपोर्ट देनी होगी。
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NCERT/SCERT अनिवार्य: कक्षा 8 तक केवल सरकारी मानक की सस्ती किताबें ही पढ़ाई जाएं。
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RTE धारा (29) का पालन: निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें (जो 3-5 गुना महंगी हैं) खरीदने का दबाव बनाना कानून का उल्लंघन है。
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स्कूल बैग नीति 2020: भारी बैग के बोझ को कम करना और छात्रों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है。




